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गीता {श्रीमद्भगवद्गीता}
महाभारते यदा युद्धभूमौ अर्जुनः सम्मुखमेव रणाय समुद्यतानां धृतराष्ट्रपुत्राणां दुर्योधनादीनां सेनां पश्यति तदा तैः भ्रातृभिः अन्यैः सम्बन्धिभिश्च सह असौ योद्धं नेच्छति । तस्य मनसि मोहः जायते । तदा तस्य रथस्य सारथिरूपेण स्थितः भगवान् श्रीकृष्णः तम् उद्बोधयति युद्धाय च प्रेरयति।
संजय, जो की हस्तिनापुर के दरबार में एक मंत्री थे, उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता को दिव्य दृष्टि की सहायता से पूरा देखा तथा भगवान् श्रीकृष्णः की उस मधुर वाणी को लिखा।
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भगवद गीता, शायद सभी भारतीय धर्मग्रंथों में सबसे प्रसिद्ध है, जिसे सार्वभौमिक रूप से दुनिया की आध्यात्मिक और साहित्यिक कृतियों में से एक माना जाता है। इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें और गीता को दूरदृष्टि से समझें!
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श्रीमद्भगवद्गीता
- गीता सुपरसाइट - यहाँ गीता के मूल श्लोक, विभिन्न विद्वानों द्वारा उनके अनुवाद और भावार्थ आदि दिए गए हैं।
- श्रीमद् भगवद्गीता - यहाँ पर गीता का संस्कृत में मूल पाठ, एम्पी-३, एम्पी-४, एवीआई एवं अन्य प्रारूपों (फार्मट) में गीता का पाठ उपलब्ध है।
- गीता का कर्मवाद (भारतीय पक्ष)
- श्रीमद्भगवद्गीता - श्रीमद् भगवद्गीता संस्कृत, हिंदी एवं इंग्लिश में अनुवाद, लिप्यंतरण एवं अर्थ सहित पढ़ें।
- BhagvadGita's Hindi verse translation - श्री हरिगीता - श्री दीनानाथ दिनेश द्वारा अनुवादित (१९३३)
- BhagvadGita - Sanskrit Documents Website
गीता रणभूमि की विकट परिस्थितियों में अध्यात्म और कर्तव्य की प्रेरणा का अनूठा उपदेश है। इतिहास के जानकारों और शोधकर्ताओं के अनुसार 18 फरवरी 5115 ईसापूर्व रविवार को कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच कुल 45 मिनट बातचीत हुई थी, जिसे ‘जय’ नामक काव्य में 72 पद्यों के माध्यम से व्यक्त किया गया था। हालांकि आज इसके विस्तृत संस्करण ‘महाभारत’ में यह ज्ञान 18 अध्यायों और 700 श्लोकों में वर्णित हैं। भीष्मपर्व के अध्याय 25 से 42 में वर्णित इस उपदेश को ‘गीता’, ‘भगवद्गीता’ या ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ नामों से जाना जाता है। यद्यपि इस उपदेश का लक्ष्य अर्जुन को कर्तव्य पालन के लिए उत्प्रेरित करना था; लेकिन अपने उद्भव से आज तक यह अपने उपासकों को जीवन के तमाम संशयों से उबरने का रास्ता सुझाती रही है। Important Message Of Bhagavad Gita In Our Day To Day Life In Hindi - जिस गीता पर गांधी को था पूरा भरोसा आखिर आइंस्टीन ने उसे लेकर क्यों जताया अफसोस - Amar Ujala Hindi News Live (archive.org)
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